खास टिप्स

बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण

बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण

प्याज के आंसुओं की अंतहीन गाथा

देश में एक बार फिर प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। पिछले दस साल में यह तीसरा मौका है जब प्याज की कीमतें बेकाबू हुई हैं। मई और जून में प्याज थोक बाजार में 10 रुपये प्रति किलो और खुदरा बाजार में 20 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा था लेकिन अब देश के अधिकांश बाजारों में इसकी थोक कीमत 35 रुपये किलो और खुदरा कीमत 60 रुपये किलो के पार पहुंच गई है। किसी भी फसल की अंतर-वर्ष मूल्य अस्थिरता और अंतर -वर्ष असामान्य कीमत से उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को नुकसान होता है और साथ ही अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव को जानने और इसके समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्प ढूंढना जरूरी है।

कीमतों में बार-बार असामान्य उछाल से भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक दिलचस्प बदलाव का खुलासा होता है। इस पर चर्चा करने से पहले प्याज उत्पादन के रुझानों और देश में इसकी बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण उपलब्धता पर नजर डालनी जरूरी है। हाल में दिनों में प्याज सबसे तेजी से बढऩे वाली फसल रही है। 2004-05 से 2018-19 के दौरान इसकी सालाना वृद्घि दर 10 फीसदी रही जबकि घरेलू उत्पादन 64.3 लाख टन से बढ़कर 2.349 लाख टन पहुंच गया। 2004-05 में इसकी प्रति व्यक्ति उपलब्धता 5.15 किलो थी जो 2018-19 में तीन गुना बढ़कर 15.7 किलो पहुंच गई। खाद्य पदार्थों के मामले में प्रति व्यक्ति खपत के हिसाब से देश में प्याज के बाद खाद्य तेल का स्थान है। जाहिर है कि भारतीय तेजी से मसालेदार और तेलयुक्त खाद्य पदार्थों का रुख कर रहे हैं जबकि सरकार का लक्ष्य पोषाहार को बढ़ावा देना है।

यह वास्तव में आश्चर्य की बात है कि प्याज की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, इसकी मात्रा में थोड़ी कमी से ही कीमत में भारी उछाल आती है। यह औसत भारतीय के खपत व्यवहार में बदलाव और इसे संभालने की व्यवस्था में कमी की ओर इशारा करता है। हालांकि प्याज देश के लोगों का मुख्य आहार नहीं है और इसका इस्तेमाल शोरबा बनाने और सलाद में किया जाता है। लेकिन इसकी भारी मांग से साबित होता है कि लोग इसकी खपत में कमी को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। ऐसा लगता है कि उपभोक्ता इसका इस्तेमाल छोडऩे के बजाय सामान्य कीमत से तीन-चार गुना दाम देने को तैयार हैं। सामाजिक दबाव के कारण भी लोग प्याज की खपत नहीं घटाना चाहते हैं। वे ऐसा नहीं दिखाना चाहते हैं कि बढ़ी कीमत के कारण वे प्याज नहीं खा रहे हैं।

हाल के हफ्तों में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण उत्पादन में कमी है। महाराष्ट्र देश में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और यहीं से इसकी कीमत तय होती है। राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात के कारण रबी के पिछले मौसम में प्याज का रकबा बहुत घट गया था। इस कारण राज्य में प्याज के सालाना उत्पादन में 9.11 फीसदी की कमी आई। यही वजह है कि नेफेड ने जून में रबी की फसल के तैयार होने के बाद प्याज की रिकॉर्ड खरीद की ताकि सितंबर से नवंबर में कम आपूर्ति के दौरान प्याज की कीमतों को संभाला जा सके। खरीफ के मौसम में उगाई जाने वाली प्याज की दूसरी फसल महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण बरबाद हो गई। प्याज के उत्पादन में कमी की आशंका के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार ने प्याज की कीमतें बढऩे पर व्यापारियों के लिए प्याज की भंडारण सीमा तय की और इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया पहले कदम का मकसद इसकी जमाखोरी रोकना है और दूसरे का लक्ष्य निर्यात के लिए जा रही फसल को घरेलू बाजार की तरफ मोडऩा है। कुछ लोगों ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की है जो इसकी मूल्य की स्थिति को समग्रता के साथ नहीं देखते। खाद्य पदार्थों के व्यापार में मामले में भारत और अधिकांश अन्य देश मुक्त व्यापार के बजाय रणनीतिक उदारीकरण की नीति का पालन करते हैं। इस नीति में उत्पादन की कमी से निपटने के लिए आयात को उदार बनाया जाता बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण है और निर्यात प्रतिबंधित किया जाता है। दूसरी ओर बंपर फसल होने पर इसका उलटा होता है यानी आयात पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

इस नीति के मुताबिक किसानों को कम कीमत से बचाने बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण के लिए अक्सर कृषि और खाद्य जिंसों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाता है। हालांकि उपभोक्ताओं को इसका खमियाजा भुगतना पड़ता है। मौजूदा स्थिति उपभोक्ता के हित में है क्योंकि तीन महीने की कम अवधि में प्याज की कीमतें तीन गुना बढ़ गई हैं। कीमतों में बढ़ोतरी से उन किसानों को मोटा मुनाफा हुआ है जिन्होंने अपनी रबी की फसल बेचने का इंतजार किया। नवंबर में बाजार में खरीफ की फसल आनी शुरू होगी या कीमतें सामान्य होंगी, तो निर्यात पर से प्रतिबंध हटने से किसान प्रभावित नहीं होंगे।

कीमतों में बार-बार उतार-चढ़ाव और मांग एवं आपूर्ति की मौजूदा स्थिति से भविष्य में मूल्यों को स्थिर रखने के लिए कई सबक मिलते हैं। पहला सबक यह कि प्याज की कीमतों में कमी के लिए पूरे साल इसकी निरंतर आपूर्ति की जरूरत है। हालांकि उत्पादन में उतार-चढ़ाव आ सकता है। कीमतों को स्थिर रखने के लिए सार्वजनिक भंडारण पर निर्भरता जरूरी है। हम निजी क्षेत्र से भूमिका निभाने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं क्योंकि कीमतों में किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव से निजी क्षेत्र को फायदा होता है। अगर नेफेड ने कीमत स्थिरीकरण कोष के रूप में 53,000 टन प्याज की खरीद नहीं की होती तो इसकी कीमतें आसमान पर पहुंच गई होतीं। इसमें से महाराष्ट्र से 45.53 हजार टन प्याज खरीदा गया था जिसे बाजार में उतारा गया। देश को मौसमवार उत्पादन और मांग के मुताबिक रबी और खरीफ के मौसम के अंत में प्याज का उचित भंडार रखना चाहिए। यह न केवल उपभोक्ताओं बल्कि किसानों के लिए भी फायदेमंद होगा।

साथ ही कच्चे प्याज के विकल्प के रूप में प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे निर्जलित प्याज और प्याज पेस्ट को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। एक उपाय यह है कि देश के प्याज उत्पादन का आधार बहुत कम है और इसमें महाराष्ट्र का एक-तिहाई योगदान है। मौसम में अनियमितताएं बढ़ रही है जिससे भविष्य में उत्पादन में उतार-चढ़ाव बढऩे की आशंका है। भौगोलिक विविधीकरण और कुछ नए इलाकों में प्याज की खेती, खासकर उत्तरी राज्यों में खरीफ के मौसम में प्याज उगाने से उत्पादन में उतार-चढ़ाव और कीमतों में अस्थिरता पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही अलग-अलग इलाकों के अनुकूल प्याज की किस्में विकसित करने की जरूरत है ताकि बाजार में हर मौसम में प्याज की आपूर्ति बनी रहे। इसके अलावा प्याज के बारे में बाजार के खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है और एफएओ की चेतावनी व्यवस्था की तर्ज पर पूर्व समायोजन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इस व्यवस्था के तहत अगले सत्र में अनुमानित कीमतों के बारे में किसानों को परामर्श जारी किया जाना चाहिए ताकि वे उसके हिसाब से रकबा घटा-बढ़ा सकें। इन उपायों से देश में प्याज के आंसुओं के चक्र को रोका जा सकता है।

(चंद नीति आयोग के सदस्य हैं। सक्सेना राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीति अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में प्रधान अर्थशास्त्री हैं। ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

Focused Fund- फोकस्ड फंड

क्या होता है फोकस्ड फंड?
फोकस्ड फंड (Focused Fund) म्यूचुअल फंड निवेश का एक वर्ग होता है, जिसमें स्टॉक के छोटे प्रकार शामिल होते हैं। इस निवेश स्कीम के साथ, फंड विभिन्न इक्विटी पोजिशनों के विविध मिक्स्चर की जगह केवल कुछ क्षेत्रों के सीमित वैरिएशन में केंद्रित होते हैं। ये फंड अधिकतर अपनी पोजिशन लगभग 20-30 कंपनियों में होल्ड करते हैं, जबकि अन्य फंड 100 से अधिक कंपनियों में अपनी पोजिशन होल्ड करते हैं। स्टॉक खरीदने के लिए सीमित संख्या में कंपनियों को चुनने के मैनडेट के कारण इन फंडों को ‘सर्वश्रेष्ठ आइडिया फंड' के नाम से भी जाना जाता है। फोकस्ड इक्विटी फंड निवेश आम तौर पर वरिष्ठ निवेशकों तथा उच्च जोखिम लेने वाले व्यक्तियों के लिए होते हैं।

फोकस्ड फंड का क्या उद्देश्य है?
साधारण म्युचुअल फंडों में निवेश करने के मुख्य लाभों में इक्विटी निवेशों में विविधता को बढ़ाना है। अधिकांश म्युचुअल फंड बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियों में निवेश करते हैं जिनमें प्रत्येक सिक्योरिटी को चुनने के झंझट से निवेशकों को बचाने के लिए पूर्व-निर्धारित भारांक होते हैं। अब जहां यह विविधीकरण जोखिमों और अस्थिरता को कम करने के जरिए निवेशकों को उनके रिटर्न को अधिकतम बनाने में सहायता करता है, वहीं वे कुछ कमियां भी प्रस्तुत कर सकते हैं। उदाहरण के लिए जब निवेश विभिन्न सेक्टरों और कंपनियों में फैला रहता है, उनसे प्राप्त रिटर्न भी सीमित हो सकता है क्योंकि सभी कंपनियों का प्रदर्शन एक ही समय बहुत अच्छा नहीं हो सकता। फोकस्ड म्यूचुअल फंडों का मुख्य उद्देश्य सावधानीपूर्वक शोध किए गिए गए इक्विटी और डेट फंडों की सीमित संख्या के बीच अपनी होल्डिंग्स को आवंटित करना है।

भले ही ये फंड वैसे लाभ प्रस्तुत नहीं करते जो फंडों के विविधीकरण के साथ आता है, वे उन लाभों पर भरोसा करते हैं जो सावधानीपूर्वक शोध किए गिए गए स्टॉक के साथ आते हैं। इस प्रकार, इन फंडों से रिटर्न को अधिक अस्थिर समझा जाता है। वे म्युचुअल फंडों की तुलना में अधिक जोखिम भरे होते हैं जो बड़ी संख्या में स्टॉक में निवेश करते हैं लेकिन वे उच्च रिटर्न भी प्रदान करते हैं। उन्हें ‘कंसंट्रेटेड फंड' या ‘अंडर-डायवर्सिफायड' फंड के नाम से भी जाना जाता है।

Investment Tips: महंगाई को मात देने के लिए इक्विटी, बॉन्‍ड या म्‍यूचुअल फंड में से कहां करें निवेश? किसमें मिलेगा ज्‍यादा रिटर्न

बढ़ती महंगाई सभी को परेशान करती है.

Investment Tips- एक निवेशक के लिए पूंजी निवेश के बहुत से विकल्‍प बाजार में उपलब्‍ध हैं. कुछ में गारंटीड रिटर्न मिलता है . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 14, 2022, 17:35 IST

हाइलाइट्स

तेजी से बढ़ती महंगाई धीरे-धीरे लोगों की दौलत को कम करती जाती है.
महंगाई के मुकाबले ज्‍यादा रिटर्न देने वाले विकल्‍प में निवेश फायदेमंद है.
लॉन्‍ग टर्म में ज्‍यादा रिटर्न लेने के लिए कई निवेश विकल्‍प उपलब्‍ध हैं.

नई दिल्‍ली. महंगाई लगातार बढ़ती रहती है. ऐसे में हर कोई चाहता है कि वह ऐसी जगह निवेश करें, जहां उसे महंगाई के मुकाबले ज्‍यादा रिटर्न मिले, ताकि उसकी पूंजी पर मुद्रास्‍फीति का असर कम हो. वित्‍तीय सलाहकारों का कहना है कि लंबी अवधि के दौरान इक्विटी में निवेश करके आप महंगाई को मात दे सकते हैं. वहीं, कुछ का कहना है कि लंबी अवधि में म्‍यूचुअल फंड शानदार रिटर्न भी देते हैं और जोखिम की दर भी कम ही रहती है. ऐसे में निवेशकों के सामने दोनों में से बेहतर विकल्‍प चुनने की चुनौती खड़ी हो जाती है. आइए, हम विशेषज्ञों की राय के जरिये आपकी कुछ मदद करने की कोशिश करते हैं.

शेयर इंडिया के उपाध्यक्ष और रिसर्च हेड रवि सिंह का कहना है कि मुद्रास्फीति अब भी अनिश्चितता का विषय बनी हुई है. इससे बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि कमोडिटी और एफएमसीजी, बिजली व ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के स्‍टॉक्‍स में निवेश किया जाए. जब कीमतें बढ़ती हैं तो इन क्षेत्रों में मजबूती आती है. इससे निवेशक को फायदा होता है.

इक्विटी इनवेस्‍टमेंट सबसे बेहतर
लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेल्थ मैनेजमेंट फर्म ट्रू बीकन के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर रोहित बेरी का कहना है कि कंपाउंडिंग निवेश का सबसे अच्‍छा दोस्‍त है. दूसरा, अगर आपने टैक्‍स बचा लिया तो समझ लीजिए कि आपने पैसे कमा लिए. बेरी का कहना है, “निवेशक को अपनी बचत का केवल एक दीर्घकालिक हिस्सा इक्विटी जैसे अस्थिर एसेट क्‍लास में इनवेस्‍ट करना चाहिए. इसी तरह इमरजेंसी फंड को ऐसी जगह लगाना चाहिए, जहां जरूरत पड़ने पर उस पैसे को आसानी से निकाला जा सके और कोई आर्थिक नुकसान भी न हो. बाजार की अस्थिरता से घबराएं नहीं. बाजार गिरने के बाद अगर आपने अपनी पूंजी निकाल ली तो आपको बहुत नुकसान होगा.”

बेरी का कहना है कि अगर आप अपने पैसे को घर में रखेंगे तो वह समय के साथ कम होता जाएगा. इसी तरह लॉन्‍ग टर्म के लिए बॉन्‍ड में पैसे लगाना भी समझदारी नहीं है. 5 साल की अवधि में इक्विटी महंगाई से ज्‍यादा रिटर्न देती है, लेकिन बॉन्‍ड ऐसा करने में असफल रहते हैं.

म्‍यूचुअल फंड में लगाएं पैसा
रवि सिंह का कहना है कि म्यूचुअल फंड्स निवेश का अच्छा विकल्प हैं. यह कई कंपनियों या क्षेत्रों में निवेश करके निवेशक के पोर्टफोलियो में विविधता लाता है. विविधीकरण ही पोर्टफोलियो जोखिम को कम करने और मुनाफा बढ़ाने का सबसे अच्‍छा तरीका है. इस काम को म्‍यूचुअल फंड में निवेश करके आसानी से किया जा सकता है. म्‍यूचुअल फंड में निवेश से निवेशक को बहुत कम खर्च पर पोर्टफोलियो मैनेजर्स की सेवाएं और बहुत से स्‍टॉक्‍स मिल जाते हैं.

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAF) में निवेश
अपसाइड एआई की सह-संस्थापक कनिका अग्रवाल के अनुसार, बैलेंस्ड बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण एडवांटेज फंड (BAF) गिरते बाजार में जोखिम को कम करते हुए निवेशक को इक्विटी एक्‍सपोजर देता है. निवेश के लिए यह अच्‍छा विकल्‍प तो है, लेकिन मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस फंड का चयन करते हैं. कई बार ऐसा भी हुआ है कि बीएएफ जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने में असफल रहे हैं.

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एक ही फंड में निवेश साबित हो सकता है घाटे का सौदा, पोर्टफोलियो का Diversification इस प्रकार है फायदेमंद

आपके निवेश पोर्टफोलियो का मतलब है आपके द्वारा किए गए निवेशों का संग्रह।

Portfolio Diversification के कई तरीकें हैं पहला तरीका है परिसम्पत्तियों का आवंटन अर्थात अचल संपत्ति गोल्ड ईटीएफ बॉन्ड म्यूचुअल फंड जैसे निवेश विकल्पों में से किसी एक में निवेश करने के बजाय इन सभी में संगठित और व्यवस्थित तरीके से निवेश करके अपने पूरे पोर्टफोलियो की जोखिम को कम करना।

नई दिल्ली, लिजी चैपमैन। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काफी जल्दी निवेश की बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण शुरुआत करते हैं, लेकिन उनसे कई ज्यादा लोग ऐसे होते हैं जो काफी देर हो जाने के बाद भी निवेश नहीं करतें। 1981 से 1996 के बीच पैदा हुए मिलेनियल्स में यह आदत काफी आम है। ध्यान देने लायक बात है कि मिलेनियल्स भारत की राष्ट्रीय घरेलु आय का 70% और कामकाज करने वाली आबादी का 46% हिस्सा है। इसका अर्थ ये नहीं है कि यह लोग निवेश के बारे में गंभीर नहीं हैं।

कोविड-19 के कारण शेयर बाजारों में 40% की गिरावट के बावजूद, देश में डिस्काउंट ब्रोकर्स के पास खाता खोलने में लगभग 70% की वृद्धि बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण हुई, जिनमें से 80% खातें मिलेनियल्स निवेशकों के थे। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि अधिकतर मिलेनियल्स निवेश के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए सक्रिय रूप से आगे आ रहे हैं, खास कर म्यूच्युअल और इक्विटी फंड्स में निवेश कैसे करना है यह जानने में उन्हें विशेष रुचि है।

इंवेस्टमेंट का Diversification

नए निवेशकों के लिए मुश्किल और संवेदनशील विषय पर चर्चा (जो हम बहुत जल्द ही करेंगे) शुरू करने से पहले, हम आपको पोर्टफोलियो विविधीकरण के बारे में जानकारी देना चाहते हैं, ताकि आप बाद में नहीं, बल्कि निवेश को शुरू करते समय ही इसे ध्यान में रख सकते हैं।

आपके निवेश पोर्टफोलियो का मतलब है आपके द्वारा किए गए निवेशों का संग्रह, चाहे वह सावधि जमा हो या स्टॉक्स में हो। पोर्टफोलियो विविधीकरण क्या है बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण और इसे क्यों किया जाना चाहिए इन दोनों सवालों के जवाब आपस में जुड़े हैं, इसलिए हम यहाँ आपको कुल जानकारी दे रहे हैं।

मूल रूप से, जब आपके निवेश पोर्टफोलियो की बात आती है, तो हमेशा ध्यान रखें कि दौड़ में कभी भी दौड़ में सिर्फ एक घोड़े पर दांव नहीं लगाया जाता। इस तरह से अगर आपका एक घोड़ा हार जाता है तो आपने जिस दूसरे घोड़े पर दांव लगाया है वह आपको नुकसान से बचा सकता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आपने कोविड-19 से पहले अपनी पूरी बचत को यात्रा उद्योग में निवेश किया होता, तो आप संभवतः अपनी अधिकांश या पूरी पूंजी खो देते, जबकि अगर आपने यात्रा और एडटेक दोनों में निवेश किया होता, तो यात्रा उद्योग में किया हुआ आपका निवेश डूब जाता लेकिन एडटेक में निवेश में मिलने वाले लाभों से आप उस नुकसान की भरपाई कर लेते। इस प्रकार से अपने पोर्टफोलियो में सही तरीके से विविधता लाकर आप अपनी पूरी निवेश पूंजी को खोने से बचा सकते हैं। जोखिम को फैलाकर उसे कम करना इसका मूल उद्देश्य है।

इसके कई तरीकें हैं; पहला तरीका है परिसम्पत्तियों का आवंटन, अर्थात अचल संपत्ति, गोल्ड ईटीएफ, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड जैसे निवेश विकल्पों में से किसी एक में निवेश करने के बजाय इन सभी में संगठित और व्यवस्थित तरीके से निवेश करके अपने पूरे पोर्टफोलियो की जोखिम को कम करना।

आप इन परिसंपत्तियों को किस तरह से आवंटित करते हैं यह आपकी जोखिम उठाने की क्षमता पर या निवेश करते समय आप कितनी मात्रा में जोखिम उठाने के लिए तैयार है इस पर निर्भर करता है। जैसा कि हमने अपने निवेश की शुरूआत करने वालों के लिए मार्गदर्शन में उल्लेख किया है, निवेश पर आपको मिलने वाले लाभ जोखिम के अनुपात में होते हैं। यदि आप किसी पेशेवर से परामर्श नहीं कर रहे हैं, तो आपको कुछ मुद्दों पर सोचना होगा कि आपके पास बचत कितनी है, यदि निवेश में नुकसान होता है तो आपकी बचत कितना नुकसान सह सकती है और गवायी हुई पूंजी को वापिस पाने में कितना समय लगेगा।

अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने का और एक तरीका है - किसी एक निश्चित परिसंपत्ति वर्ग के भीतर विभिन्न विकल्पों में निवेश करना। इसलिए, उदाहरण के तौर पर, अगर आप शेयर्स में निवेश कर रहे हैं, तो आपको सावधान रहना चाहिए कि अपने सभी निवेशों को सिर्फ एक सेक्टर में केंद्रित न करें। स्टॉक्स में भी, जिनमें ज्यादा लाभ देने की अच्छी क्षमता और संभावना दिखती है उन विभिन्न सेगमेंट्स में निवेश करते रहें।

वास्तव में, एक निश्चित सेगमेंट के भीतर भी, आप अपने निवेश में विविधता ला सकते हैं। भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कंपनियों को उनके बाजार पूंजीकरण (कंपनी के बकाया शेयरों का बाजार मूल्य) को लार्ज-कैप (उच्च बाजार मूल्य), मिड-कैप और स्माल-कैप (कम बाजार मूल्य) बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

लार्ज-कैप कंपनी में निवेश करने से मिलने वाले फायदें और नुकसान मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करने के फायदें और नुकसान से अलग होते हैं क्योंकि इन सभी कंपनियों की वृद्धि और उनमें होने वाले परिवर्तन के चरण अलग-अलग होते हैं। लार्ज-कैप कंपनी के स्टॉक्स अच्छी तरह से स्थापित और स्थिर होते हैं, लेकिन उनमें किए गए निवेश में वृद्धि की संभावना ज्यादा नहीं है, जबकि स्मॉल और मिड-कैप स्टॉक्स ज्यादा अस्थिर होते हैं क्योंकि वे बाजार में नए हैं, लेकिन उनमें विकास की संभावनाएं काफी ज्यादा होती हैं। दिए गए किसी एक सेगमेंट में एक के बजाय विभिन्न कंपनियों में निवेश करने से आपके निवेश में सही विविधता आ सकती है।

अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के बारे में सबसे अच्छी बात बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण यह है कि इससे आप अल्पकालिक अस्थिरता से सुरक्षित रह सकते हैं। जब आप अपने निवेश के प्रति एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को अपनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे होते हैं, तब बाजार के बाजार की अस्थिरता से बचा सकता है विविधीकरण अस्थायी रुझानों के आधार पर अल्पकालिक निवेश करने की आपकी संभावना कम होती है। विविधीकरण एक संगठित दृष्टिकोण है, भले ही अल्पावधि में ज्यादा नुकसान दिखाई दे रहा हो, लेकिन दीर्घावधि में उसे कम किया जा सकता है। आपके लिए यह केवल एक अस्थायी गड़बड़ से अधिक कुछ नहीं है क्योंकि आपका लक्ष्य दीर्घकालिक विकास और लाभ प्राप्त करना है।

पोर्टफोलियो विविधीकरण का एक अंतिम लाभ यह भी है कि इससे आप एक निवेशक के रूप में अपने कौशल को बढ़ाते हैं। शेयर्स और परिसंपत्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला में निवेश करने से आपको अर्थव्यवस्था का व्यापक दौर दिखाई देगा और कौन-सा निवेश आपके लिए सबसे बेहतर है इसके बारे में आपका अंतर्ज्ञान बढ़ेगा। जैसे आपके लाभ बढ़ते जाएंगे वैसे आप बढ़ते रहेंगे और आपको बेहतर आइडियाज आते रहेंगे।

याद रखें कि बाज़ार में गति हमेशा बनी रहेगी, लेकिन लंबी दौड़ में पोर्टफोलियो का विविधीकरण आपको सभी उतार-चढ़ावों से बचाता रहेगा।

(लेखक ZestMoney के सीईओ और को-फाउंडर हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

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